बड़ा खुलासा: CAG रिपोर्ट ने बताया सेना की ताकत बढाने के नाम पर 2009 से 2013 के बीच…

बड़ा खुलासा: CAG रिपोर्ट ने बताया सेना की ताकत बढाने के नाम पर 2009 से 2013 के बीच…


चीन और पाकिस्तान बॉर्डर पर जारी तनाव के बीच भारत के CAG (नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक) की एक रिपोर्ट में साफ तौर से कहा गया है कि भारत के पास लंबे समय तक युद्ध के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं हैl सीएजी ने सेना के पास गोला-बारूद में भारी कमी होने की रिपोर्ट संसद में पेश की हैl रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि अगर भारतीय सेना को लगातार 10 दिन युद्ध करना पड़ गया तो उसके पास पर्याप्त गोला-बारूद नहीं हैl






आप इसे पढ़कर सोचेंगे कि ऐसा कैसे हुआ कि हमरे पर पर्याप्त गोला बारूद नहीं! तो आपको बता दें कि भारत को ये कमी देने वाला और कोई नहीं बल्कि कांग्रेस शासन हैl जी हाँ! कांग्रेस ने देश का वो हाल करके गई है कि अब ये कहना गलत नहीं कि अँगरेज़ तो चले गए, कांग्रेस छोड़ गएl




यकीन नहीं होता तो इस कैग रिपोर्ट की ही सुनिए जो कहती है कि भारतीय सेना की ताकत बढे, इसके लिए 2009 से 2013 के बीच हथियार, फाइटर प्लेन आदि खरीदने के लिए कई डील किए गए थेl लेकिन ये डील्स यूँ ही रह गई, इन में से अधिकतर जनवरी 2017 तक पेंडिंग थेl कांग्रेस अगर इन चीज़ों पर नियंत्रण रखती और परवाह करती तो आज तस्वीर कुछ और ही होतीl मोदी सरकार अब तक भी कांग्रेस के डैमेजेज़ को सही करती रहती हैl






वहीँ दूसरी और कैग रिपोर्ट में ये भी आया कि देश की ऑर्डिंनेस फैक्ट्रियां पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाने के साथ क्षतिग्रसत सामानों की मरम्मत भी नहीं कर पा रही हैl गोला-बारूद के डिपो में अग्निशमनकर्मियों की कमी रही और उपकरणों से हादसे का खतरा रहाl रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी में आर्मी के गोला-बारूद मैनेजमेंट का फॉलोअप ऑडिट किया गयाl




बख्तरबंद वाहन की क्षमता बताया गया है कि ऑपरेशन की अवधि (ड्यूरेशन) की जरूरतों के हिसाब से सेना में वॉर वेस्टेज रिजर्व रखा जाता हैl रक्षा मंत्रालय ने 40 दिन की अवधि के लिए इस रिजर्व को मंजूरी दी थीl 1999 में आर्मी ने तय किया कि कम से कम 20 दिन की अवधि के लिए रिजर्व होना ही चाहिएl सितंबर 2016 में पाया गया कि सिर्फ 20 फीसदी गोला-बारूद ही 40 दिन के मानक पर खरे उतरेl 55 फीसदी गोला बारूद 20 दिन के न्यूनतम स्तर से भी कम थेl हालांकि इसमें बेहतरी आई है, लेकिन बेहतर फायर पावर को बनाए रखने के लिए बख्तरबंद वाहन और उच्च क्षमता वाले गोला-बारूद जरूरी लेवल से कम भी पाए गए हैंl




रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय ने 2013 में रोडमैप मंजूर किया था, जिसके तहत तय किया गया कि 20 दिन के मंजूर लेवल के 50 फीसदी तक ले जाया जाए और 2019 तक पूरी तरह से भरपाई कर दी जाएl 10 दिन से कम अवधि के लिए गोला-बारूद की उपलब्धता क्रिटिकल (बेहद चिंताजनक) समझी गई हैl 2013 में जहां 10 दिन की अवधि के लिए 170 के मुकाबले 85 गोला-बारूद ही (50 फीसदी) उपलब्ध थे, अब भी यह 152 के मुकाबले 61 (40 फीसदी) ही उपलब्ध हैंl





2008 से 2013 के बीच खरीदारी के लिए 9 आइटमों की पहचान की गई थीl 2014 से 2016 के बीच इनमें से पांच के ही कॉन्ट्रैक्ट पर काम हो सका हैl हालांकि कमी को दूर करने के लिए प्रयास ज़ोरों पर किये जा रहे हैंl



ऐसी ही बहुत से चिंताजनक बातें जो खौफ पैदा करने वाली भी हैंl पर मोदी सरकार इनको नज़रंदाज़ नहीं कर रही बल्कि लगातार इस पर काम करते हुए नए नए तरीके आजमा रही हैं l पिछले कुछ वक़्त में मोदी सरकार ने बहुत से ऐसे प्रोजेक्ट्स, डील्स को हरी झंडी दिखाई है जो आगे चलकर लाभदायी साबित होंगीl हम एक के बाद एक मिसाइलों की testing कि खबरें सुनते हैं, डिफेन्स को लेकर बड़े बड़े सौदे कर रही हैl ये सब दर्शाता है सरकार उन दिनों कीन तैयारियां ज़ोरों शोरों से कर रही है जब सेना का बॉर्डर पर उतरने का समय आएगाl




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